
मुनि सघ के सानिध्य में पूज्य विमल सागर जी महाराज की जन्म जयंती पूजा अर्चना के साथ मनाई गई।
धार्मिक अनुष्ठानों से होती है धर्म की प्रभावना धर्म संस्कृति से बच्चों को करें संस्कारित, विश्रुत सागरजी

खंडवा। जैन श्रमण परंपरा के ध्वजवाहक आचार्य विमलसागरजी महाराज का ११० वां जन्मजयंती समारोह आज मुनिसुव्रतनाथ जिन मंदिर नवकार नगर में भक्ति, हर्ष और उल्लास के साथ मनाया गया। शनिवार प्रातः आयोजित समारोह में बडी संख्या में श्रावक – श्राविकाओं ने परम पूज्य उपाध्याय १०८ विश्रुतसागरजी एवं निर्वेदसागरजी महाराज के सानिध्य में अभिषेक, धारा एवं पूजन का लाभ प्राप्त किया। इस अवसर पर आयोजित विधान पूजन में कमलेश रश्मि जैन ने सौधर्म इंद्र-शचि इंद्राणी रूप में पूजन का सौभाग्य अर्जित किया ! इस अवसर पर आचार्यश्री विमलसागरजी महाराज का संगीतमय पूजन विभिन्न
सामाजिक,धार्मिक मंडलों की सहभागिता से किया गया। ब्रम्हचारी पारस भैया,अतुल जैन,पायल जैन के स्वरों के साथ उपस्थित श्रावकों ने पूजन संपन्न किया। समाज के सचिव सुनील जैन ने बताया कि इस अवसर पर अपने प्रवचन मे़ विश्रुत सागर जी महाराज ने पूज्य आचार्य विमलसागरजी महाराज के जीवन परिचय,वात्सल्य भाव ,श्रमण परंपरा और चमत्कारिक शक्ति का संबोधन किया। मुनि श्री ने कहा कि धार्मिक त्यौहार एवं इस प्रकार के आचार्य मुनियों के अनुष्ठान से धर्म की प्रभावना होती है और हमें पुण्य की प्राप्ति होती है, ऐसे धार्मिक अनुष्ठानों में हम हमारे बच्चों को भी शामिल करें ताकि वे भी धर्म और संस्कृति से संस्कारित होते रहे। कार्यक्रम का संचालन पंकज जैन ने किया। मुनि सेवा समिति के प्रचार मंत्री सुनील जैन प्रेमांशु चौधरी ने बताया कि कार्यक्रम व्यवस्थापन प्रकाश जैन,सुलभ सेठी,अजय पाटनी,तरुण गंगवाल, मनीष सेठी,मनीष पाटनी,पंकज सेठी,आयुष पाटोदी ने किया। नीता लुहाड़िया, हिना झांझरी,नीति गोधा ने इस अवसर पर सुंदर रांगोली से मंडल विधान रचना की। मुनि सेवा समिती एवं समस्त ट्रस्ट मंडल सदस्य इस अवसर पर उपस्थित रहे। पूज्य उपाध्याय संघ की आज की आहारचर्या श्रीमती गुणमाला भानुकुमार सेठी एवं श्रीमती वंदना अविनाश जैन परिवार के सहयोग से संपन्न हुई।










